रिपोर्ट – नसीरुद्दीन वरिष्ठ पत्रकार खेतासराय
जौनपुर खेतासराय में गाजी मियां का परंपरागत मेला इस वर्ष भी प्रशासनिक अनुमति न मिलने के कारण नहीं लगाया जा सका। प्रशासन ने शांति व्यवस्था का हवाला देते हुए मेले की अनुमति देने से इनकार कर दिया। पिछले वर्ष भी मेले की इजाजत नहीं मिली थी।मेले पर प्रतिबंध के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई। नगर के उत्तरी छोर पर स्थित डोभी वार्ड के खेतों और लहबर क्षेत्र की ओर दिनभर लोगों का आना-जाना लगा रहा।
कई श्रद्धालु गाजी मियां की मजार पर मत्था टेकने और मन्नतें मांगने पहुंचे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। कुछ लोगों को समझाकर वापस भेजा गया, जबकि कई को खदेड़ दिया गया।मजार के आसपास शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। मौके पर उपनिरीक्षक अनिल पाठक और संजय पांडेय सहित पांच पुलिसकर्मी मौजूद थे।
खुटहन से आईं 62 वर्षीय श्रद्धालु फूलमती ने बताया कि वह 15 साल की उम्र से हर वर्ष यहां आती रही हैं। उन्होंने कहा कि अपनी आस्था के कारण वह आज भी चढ़ावा लेकर आई थीं।परंपरा के अनुसार, कई श्रद्धालुओं ने खेतों में मिट्टी के बर्तन में पकवान बनाकर ‘कनूरी’ भी की। स्थानीय लोगों ने बताया कि मेले पर रोक की सूचना दूर-दराज के कई गांवों तक नहीं पहुंच पाई थी, जिसके चलते लोग यहां पहुंचते रहे।
मेले पर प्रतिबंध के कारण इस बार खेतासराय से गोरारी तक लगभग तीन किलोमीटर के दायरे में लगने वाली भीड़, अस्थायी दुकानें, झूले और सर्कस पूरी तरह नदारद रहे। सड़कें सामान्य दिनों की तरह शांत दिखीं।थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह ने जानकारी दी कि गाजी मियां के नाम पर लगने वाले गुरखेत मेले की अनुमति इस बार भी नहीं दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति किसी भी धार्मिक, सांस्कृतिक या व्यावसायिक गतिविधि की इजाजत नहीं होगी। पुलिस 24 घंटे निगरानी कर रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
